Antarman Se…

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अंतर्मन से काव्य संग्रह आपके हाथों में है। मेरी साहित्यक यात्रा का यह पहला काव्य संग्रह आपको सौंपकर प्रसन्नता का अनुभव कर रही हूँ। आशा है सुधी पाठक छंद मुक्त शैली में लिखी गई कविताओं को पढ़कर आनंद प्राप्त करेंगे

पीड़ा न हो तो शायद कविता जन्म लेगी ही नहीं । फिर भी सोचकर लिखना शुरू नहीं किया । अपने आस पास, अपने परिवेश में भुत कुछ ऐसा घटित होते देखा, जो किसी भी संवेदनशील ह्रदय को पीड़ा से भर दे । और यही पीड़ा जब घनीभूत हो जाती है तब कविता का रूप ले लेती है। में कोई कवि या साहित्य कर नहीं हूँ। बस यह मन की भावनाओं को कागज पर उतारने का प्रयास है।

मेरे इस संकलन में करीबन सभी कविताएं छंद मुक्त शैली में लिखी गई हैं। हर कविता अलग विचारों को लेकर लिखी गई हैं। अपना संदेश संप्रेषित कर पाने में ये कितनी सफल हुई हैं इसका निर्णय तो सुधी पाठक गण ही करेंगे ।

रचनाएं चार भागों में विभक्त हैं।

१) क्षणिकाएं, २) प्रणय-खण्ड, ३) अंतस चेतना खण्ड, ४) विविध रंग खण्ड प्रस्तुत पंक्तियों के साथ अपनी यह पहली कृति आप सुधिजनों के हाथों में सौंप रही हूँ

पथिक पथ कठिन नहीं है।

चलता चल

तूफानों से लड़ता चल ।

कठिन नहीं हैं कुछ पा जाना

दृढ़ होकर तू बढ़त चल

• अपनी बात खत्म करते हुए उन सभी के प्रति हार्दिक आभारी हूँ जिनके बिना इस पुस्तक की कल्पना साकार होनी मुश्किल थी।

सबसे पहले आभारी हूँ परम आदरणीय डॉ। विद्या केशव चिटकोंजी की जिनकी प्रेरणा से में कुछ लिख सकी । आदरणीय दीदी नए पुस्तक की समीक्षा लिखने का महत्वपूर्ण कार्य पूरे मनोयोग से किया। उनके मार्गदर्शन के बिना निस्संदेह पुस्तक का यह स्वरूप संभव नहीं था |
हार्दिक नमन करती हूँ मेरे गुरु स्वरूप डॉ आर एस तिवारी शिखरेश जी का आपने अपने शब्दों द्वारा हमेशा मेरा उत्साह वर्धन किया जब भी मैं निराश हुई आपके श लिखती रहिए प्रेरणा देते रहे।

सिर्फ शब्द ही नहीं चित्र भी बोलते हैं । आदरणीय कैलाशजी हयाल के बनाये हुए चि सभी कविताओं के भाव भली-भांति प्रगट करते हैं। आसान नहीं था इतने चित्र बनान हर रचना को उन्होंने मन से पढ़ा समय दिया और फिर वे अपनी कूँची को रंगों से सराबो कर चित्र बना सके। हार्दिक धन्यवाद कैलाशजी ।

परिवार के सहयोग के बिना किसी स्वप्न को साकार करना संभव नहीं । मेरी बेटी सुनंदा और दामाद श्री अक्षय कोल्हे हमेशा मेरे प्रेरणा स्त्रोत रहें । समय-समय फोन पर या प्रत्यक्ष रूप में मुझसे मेरी कविताएं सुनते रहे ।

मेरे भाई श्री गौतम रावत और उनकी पत्नी श्रीमती आशा रावत के अथक प्रयास से मेरी रचनाओं ने पुस्तक का रूप लिया । मेरी दोनों बहने श्रीमती सुनीता गुप्ता व श्रीमती सविता खण्डेलवाल हमेशा मुझे उत्साहित करती रहीं । ह्रदय से आभार व्यक्त करती हूँ साहित्य सरिता मंच के सभी सदस्यों का जिनसे प्रेरणा पा मैं यहाँ तक पहुँच सकी ।

अनेकानेक हार्दिक धन्यवाद देती हूँ श्री बिपिन बाकले जी को जिनके सहयोग से यह पुस्तक प्रकाशित हुई। पुनः धन्यवाद बिपीनजी ।

Description

काव्यकृति ‘अन्तर्मन से’

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क्षणिकाओं से विस्तार प्राप्त करती सुधा झालानी की कविताएं अद्भुत संगम हैं प्रकृति सानिध्य, मानवीय प्रेम, मनोविज्ञान एवं दर्शन की अनुभूति की।

अन्तस चेतना की धनी कवयित्री की रचनाएं अनुभूति, आशा और विश्वास का दीपक हैं। उसकी कविताएं खूबसूरत बिम्बों से सजी हैं। अलंकारों की छटा देखते ही बनती है। अनंत संघर्ष में भी आशावाद का गूँजता स्वर सुधाजी को थकने नहीं देता।

मानवता वादी सोच की पोषक कवयित्री के संकलन में साफ संदेश है कि घृणा, द्वेश, ईर्षा, मेरा तेरा की नीति, स्वार्थ, संशय एवं अनाचरण से कभी भी जीवन में मधुमास नहीं आ सकता।

‘अन्तर्मन से’ में इतना कुछ है जिस पर समालोचनात्मक पुस्तक

लिखी जा सकती है।

भाव पक्ष की दृष्टि से सुधाजी की काव्यकृति ‘अन्तर्मन से’ में चिन्तनपरक विचारधारा एवं रचनाधर्मिता को पंख लगाती सभी रचनाएं सफल, सार्थक एवं नई कविता की नई परिधि बनाती हैं। कला पक्ष की दृष्टि से शब्द चयन उच्चकोटि का है। शिल्प उनको अपनी है। जो न परम्परागत कविता के मानक प्रवाह की सहधर्मिणी है, बल्कि उनकी अपनी ही अनूठी शैली एवं शिल्प से पाठक को सहजता से मोह लेती है एवं उनके अन्तर्मन को छूने में सक्षम है।

डॉ. आर. एस. तिवारी ‘शिखरेश’

पूर्व सहायक निदेशक (राजभाषा) आयकर विभाग- आगरा

कवि- (हिन्दी तथा अंग्रेजी) अनुवादक एवं समीक्षक

Additional information

Weight465 kg
Dimensions25 × 17 × 2.5 cm